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विज्ञान#जबलपुर#मध्यप्रदेश

MPPSC Assistant Professor Bharti: MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में योग्यता को लेकर 4 याचिकाओं पर हाईकोर्ट का फैसला, 3 कैंडिडेट्स की उम्मीदवारी बहाल

MPPSC Assistant Professor Bharti: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में योग्यता को लेकर दायर 4 याचिकाओं पर फैसला सुनाया। इनमें 3 कैंडिडेट्स की उम्मीदवारी बहाल कर दी गई, जबकि एक उम्मीदवार को राहत नहीं मिली। मामला Zoology और म्यूजिक सब्जेक्ट की भर्ती का था। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में उम्मीदवारी रोकी गई थी सभी उम्मीदवार लिखित परीक्षा पास कर चुके थे, लेकिन दस्तावेज जांच के दौरान उनकी डिग्री और विषय की योग्यता पर सवाल उठाए गए। इसके बाद उनकी उम्मीदवारी रोक दी गई थी। मुख्य याचिकाकर्ता कार्तिकेय तिवारी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक दुबे ने कोर्ट में पक्ष रखा। कार्तिकेय तिवारी को मिली राहत कार्तिकेय तिवारी के पास बायोटेक्नोलॉजी में M.Tech, बायोसाइंसेस एंड बायोइंजीनियरिंग में PhD और लाइफ साइंसेस में CSIR UGC NET था। MPPSC ने M.Tech को टेक्नोलॉजी फैकल्टी की डिग्री मानते हुए उनकी उम्मीदवारी रोक दी थी। कोर्ट ने 22 दिसंबर 2022 के विभागीय आदेश को देखा। इसमें Zoology के 11 को, सब्जेक्ट तय किए गए थे और बायोटेक्नोलॉजी भी इसमें शामिल था। इसके आधार पर कोर्ट ने कार्तिकेय की अयोग्यता रद्द कर दी। काश्मी शर्मा और गौरी शंकर को भी राहत काश्मी शर्मा के पास Zoology में M.Sc. और पर्यावरण विज्ञान में UGC NET था। कोर्ट ने उनकी योग्यता को मान्य माना और अयोग्यता का आदेश रद्द कर दिया। इसी तरह गौरी शंकर के पास म्यूजिक में M.A., संगीत विषय में MP SET और UGC NET था। कोर्ट ने उनकी अयोग्यता भी रद्द कर दी। डॉ. कैलाश प्रसाद जायसवाल को राहत नहीं Animal Biotechnology में M.Sc. और Biotechnology में PhD करने वाले डॉ. कैलाश प्रसाद जायसवाल को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। उन्होंने NDRI का समकक्षता (Equivalence) प्रमाण पत्र भी पेश किया था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि नई शैक्षणिक समकक्षता तय करना एक्सपर्ट्स का काम है। डिपार्टमेंट की लिस्ट में सब्जेक्ट होना जरूरी फैसले में साफ हुआ कि भर्ती की मूल योग्यता और को, सब्जेक्ट विभाग तय करता है। MPPSC उसी व्यवस्था के आधार पर भर्ती कराता है। जिन सब्जेक्ट को डिपार्टमेंट की लिस्ट में शामिल किया गया था, उन उम्मीदवारों को राहत मिली। वहीं लिस्ट से बाहर के सब्जेक्ट को सिर्फ समकक्षता के आधार पर जोड़ने की मांग कोर्ट ने स्वीकार नहीं की।

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rahul garhwal
1 अक्टूबर 2026
MPPSC Assistant Professor Bharti: MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में योग्यता को लेकर 4 याचिकाओं पर हाईकोर्ट का फैसला, 3 कैंडिडेट्स की उम्मीदवारी बहाल
लेख सारांश

MPPSC Assistant Professor Bharti: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में योग्यता को लेकर दायर 4 याचिकाओं पर फैसला सुनाया। इनमें 3 कैंडिडेट्स की उम्मीदवारी बहाल कर दी गई, जबकि एक उम्मीदवार को राहत नहीं मिली। मामला Zoology और म्यूजिक सब्जेक्ट की भर्ती का था। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में उम्मीदवारी रोकी गई थी सभी उम्मीदवार लिखित परीक्षा पास कर चुके थे, लेकिन दस्तावेज जांच के दौरान उनकी डिग्री और विषय की योग्यता पर सवाल उठाए गए। इसके बाद उनकी उम्मीदवारी रोक दी गई थी। मुख्य याचिकाकर्ता कार्तिकेय तिवारी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक दुबे ने कोर्ट में पक्ष रखा। कार्तिकेय तिवारी को मिली राहत कार्तिकेय तिवारी के पास बायोटेक्नोलॉजी में M.Tech, बायोसाइंसेस एंड बायोइंजीनियरिंग में PhD और लाइफ साइंसेस में CSIR UGC NET था। MPPSC ने M.Tech को टेक्नोलॉजी फैकल्टी की डिग्री मानते हुए उनकी उम्मीदवारी रोक दी थी। कोर्ट ने 22 दिसंबर 2022 के विभागीय आदेश को देखा। इसमें Zoology के 11 को, सब्जेक्ट तय किए गए थे और बायोटेक्नोलॉजी भी इसमें शामिल था। इसके आधार पर कोर्ट ने कार्तिकेय की अयोग्यता रद्द कर दी। काश्मी शर्मा और गौरी शंकर को भी राहत काश्मी शर्मा के पास Zoology में M.Sc. और पर्यावरण विज्ञान में UGC NET था। कोर्ट ने उनकी योग्यता को मान्य माना और अयोग्यता का आदेश रद्द कर दिया। इसी तरह गौरी शंकर के पास म्यूजिक में M.A., संगीत विषय में MP SET और UGC NET था। कोर्ट ने उनकी अयोग्यता भी रद्द कर दी। डॉ. कैलाश प्रसाद जायसवाल को राहत नहीं Animal Biotechnology में M.Sc. और Biotechnology में PhD करने वाले डॉ. कैलाश प्रसाद जायसवाल को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। उन्होंने NDRI का समकक्षता (Equivalence) प्रमाण पत्र भी पेश किया था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि नई शैक्षणिक समकक्षता तय करना एक्सपर्ट्स का काम है। डिपार्टमेंट की लिस्ट में सब्जेक्ट होना जरूरी फैसले में साफ हुआ कि भर्ती की मूल योग्यता और को, सब्जेक्ट विभाग तय करता है। MPPSC उसी व्यवस्था के आधार पर भर्ती कराता है। जिन सब्जेक्ट को डिपार्टमेंट की लिस्ट में शामिल किया गया था, उन उम्मीदवारों को राहत मिली। वहीं लिस्ट से बाहर के सब्जेक्ट को सिर्फ समकक्षता के आधार पर जोड़ने की मांग कोर्ट ने स्वीकार नहीं की।

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